जिले के बुढ़ीमारी क्षेत्र में मंगलवार को उस समय माहौल गर्म हो गया जब करीब 70 छात्र-छात्राओं ने जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। छात्रों ने आरोप लगाया कि नौवीं कक्षा के लिए उन्हें ऐसे विद्यालयों में नामांकन आवंटित किया गया है जो उनके गांव से काफी दूर हैं, जिससे उनकी शिक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

9 किलोमीटर दूर स्कूल आवंटन पर नाराजगी
प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि उन्होंने उर्दू मध्य विद्यालय बुढ़ीमारी, मदरसा बुढ़ीमारी और आसपास के अन्य विद्यालयों से आठवीं कक्षा उत्तीर्ण की है। विभागीय निर्देश के अनुसार उन्हें उत्क्रमित उच्च विद्यालय मौधो में नामांकन दिया गया है, जो उनके गांव से लगभग 9 किलोमीटर दूर स्थित है।
छात्रों का कहना है कि इतनी दूरी रोजाना तय करना उनके लिए बेहद कठिन है, खासकर तब जब अधिकतर परिवारों में अभिभावक मजदूरी के लिए बाहर जाते हैं और बच्चों के लिए नियमित परिवहन की कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है। ऐसे में उन्हें पैदल यात्रा करनी पड़ेगी या निजी साधनों पर निर्भर रहना होगा, जिससे समय, ऊर्जा और सुरक्षा तीनों पर असर पड़ेगा।

बालिकाओं की शिक्षा पर भी खतरा
प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने विशेष रूप से छात्राओं की शिक्षा को लेकर चिंता जताई। उनका कहना है कि लंबी दूरी के कारण लड़कियों की नियमित उपस्थिति प्रभावित हो सकती है, जिससे उनके बीच स्कूल छोड़ने की आशंका भी बढ़ जाएगी। ग्रामीण क्षेत्रों में पहले से ही बालिका शिक्षा कई चुनौतियों का सामना कर रही है, और यह स्थिति उसे और गंभीर बना सकती है।
नजदीकी स्कूल में नामांकन की मांग
छात्रों ने बताया कि उनके गांव से मात्र लगभग 800 मीटर की दूरी पर +2 कारकुन लाल उच्च विद्यालय, अलता स्थित है, जहां नामांकन कराना उनके लिए अधिक सुविधाजनक होगा। छात्रों का कहना है कि यदि उन्हें नजदीकी विद्यालय में पढ़ने का अवसर दिया जाए तो उनकी उपस्थिति नियमित रहेगी और शिक्षा बाधित नहीं होगी।

डीईओ को सौंपा ज्ञापन
प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने जिला शिक्षा पदाधिकारी को एक ज्ञापन भी सौंपा। इसमें मांग की गई कि उनकी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए उन्हें नजदीकी विद्यालय में सामूहिक नामांकन की अनुमति दी जाए। छात्रों ने उम्मीद जताई कि शिक्षा विभाग जल्द ही उनकी समस्या पर सकारात्मक निर्णय लेगा।
शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
इस घटना ने ग्रामीण क्षेत्रों में विद्यालय आवंटन प्रणाली और शिक्षा सुविधाओं की उपलब्धता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि स्कूल आवंटन में दूरी और परिवहन जैसी बुनियादी सुविधाओं का ध्यान नहीं रखा गया, तो इससे छात्रों की शिक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है।

प्रशासन से समाधान की उम्मीद
फिलहाल छात्र-छात्राएं शिक्षा विभाग से त्वरित हस्तक्षेप और व्यावहारिक समाधान की मांग कर रहे हैं, ताकि उनकी पढ़ाई बिना किसी बाधा के जारी रह सके।
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