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कृषि में करियर: पूर्णिया कृषि कॉलेज में छात्रों का शैक्षणिक भ्रमण, वैज्ञानिकों ने बताए कृषि में करियर के अवसर

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कृषि में करियर: पूर्णिया के भोला पासवान शास्त्री कृषि कॉलेज में छात्र-छात्राओं के लिए शैक्षणिक भ्रमण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने कॉलेज परिसर का भ्रमण किया और कृषि शिक्षा, आधुनिक तकनीक, अनुसंधान, पौध उत्पादन और कृषि क्षेत्र में रोजगार की संभावनाओं के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी हासिल की। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को किताबों में पढ़ाई जाने वाली कृषि से आगे ले जाकर कृषि की व्यावहारिक गतिविधियों से परिचित कराना रहा।

शैक्षणिक भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों को कॉलेज के अलग-अलग हिस्सों का भ्रमण कराया गया। वैज्ञानिकों ने छात्रों को बताया कि आज के समय में कृषि केवल पारंपरिक खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक अनुसंधान, पौध संरक्षण, बागवानी, फ्लोरीकल्चर, बीज उत्पादन और कई अन्य क्षेत्रों में रोजगार की संभावनाएं मौजूद हैं।

कॉलेज परिसर के भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने कृषि से संबंधित विभिन्न गतिविधियों को करीब से देखा। उन्हें खेतों में इस्तेमाल होने वाली आधुनिक तकनीकों के बारे में जानकारी दी गई। वैज्ञानिकों ने बताया कि खेती में नई तकनीकों के इस्तेमाल से उत्पादन बढ़ाने, लागत कम करने और किसानों को बेहतर गुणवत्ता वाली फसल उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।

कार्यक्रम के दौरान फ्लोरीकल्चर वैज्ञानिक डॉ. शशि रंजन प्रताप सिंह ने विद्यार्थियों को कॉलेज परिसर का भ्रमण कराया। उन्होंने छात्रों को फूलों और विभिन्न प्रकार के पौधों की प्रजातियों के बारे में जानकारी दी। इसके साथ ही विद्यार्थियों को कृषि अनुसंधान से जुड़े मॉडल और कॉलेज में चल रही विभिन्न गतिविधियों के बारे में भी समझाया गया।

कृषि में करियर
कृषि में करियर

भ्रमण के दौरान छात्रों ने विशेषज्ञों से कई सवाल भी पूछे। विद्यार्थियों ने कृषि शिक्षा, पौधों की विभिन्न प्रजातियों, अनुसंधान और खेती में आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल से जुड़े सवाल किए। वैज्ञानिकों ने छात्रों के सवालों का जवाब देते हुए कृषि विज्ञान को समझने के लिए व्यावहारिक ज्ञान की भूमिका पर भी चर्चा की।

विद्यार्थियों को कॉलेज की प्रयोगशालाओं और आधारभूत सुविधाओं की जानकारी भी दी गई। वैज्ञानिकों ने बताया कि कृषि शिक्षा के साथ-साथ अनुसंधान का भी इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण स्थान है। छात्रों को बताया गया कि कृषि से संबंधित समस्याओं का वैज्ञानिक समाधान तलाशने के लिए विभिन्न स्तरों पर शोध कार्य किए जाते हैं।

कार्यक्रम के दौरान भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के तहत कृषि शिक्षा और अनुसंधान को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया के बारे में भी विद्यार्थियों को जानकारी दी गई। वैज्ञानिकों ने छात्रों को समझाया कि कृषि क्षेत्र में पढ़ाई करने के बाद उनके सामने केवल खेती या कृषि विभाग में नौकरी का विकल्प नहीं होता, बल्कि अनुसंधान, शिक्षण, तकनीकी सेवाओं और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के माध्यम से भी आगे बढ़ने के अवसर मौजूद हैं।

शैक्षणिक भ्रमण के दौरान हुई परिचर्चा में डॉ. शशि रंजन प्रताप सिंह ने विशेष रूप से कृषि क्षेत्र में करियर की संभावनाओं पर चर्चा की। उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि इंटरमीडिएट स्तर पर जीव विज्ञान, गणित या कृषि विषय से पढ़ाई करने वाले विद्यार्थी आगे कृषि शिक्षा के क्षेत्र में कदम रख सकते हैं और बीएससी एग्रीकल्चर जैसे पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेकर कृषि विज्ञान की उच्च शिक्षा हासिल कर सकते हैं।

कृषि में करियर
कृषि में करियर

उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि बीएससी एग्रीकल्चर की पढ़ाई पूरी करने के बाद सरकारी क्षेत्र में भी कई तरह के अवसर उपलब्ध हो सकते हैं। कृषि विभाग में प्रखंड कृषि पदाधिकारी, सहायक तकनीकी प्रबंधक और प्रखंड तकनीकी प्रबंधक जैसे पदों के लिए कृषि शिक्षा उपयोगी हो सकती है। इसके अलावा कृषि विषय की पढ़ाई करने वाले विद्यार्थी सिविल सर्विसेज और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी कर सकते हैं।

वैज्ञानिकों ने विद्यार्थियों को यह भी बताया कि कृषि शिक्षा में आगे पढ़ाई करने के बाद करियर के विकल्प और व्यापक हो जाते हैं। बीएससी एग्रीकल्चर के बाद विद्यार्थी एमएससी की पढ़ाई कर सकते हैं और इसके बाद पीएचडी के जरिए कृषि अनुसंधान और शिक्षण के क्षेत्र में आगे बढ़ सकते हैं।

एमएससी और पीएचडी के बाद विद्यार्थियों के लिए कृषि विश्वविद्यालयों में प्रोफेसर बनने, अनुसंधान संस्थानों में वैज्ञानिक के रूप में काम करने और कृषि विज्ञान केंद्रों में विषय विशेषज्ञ के तौर पर सेवाएं देने जैसे अवसर मौजूद हो सकते हैं। वैज्ञानिकों ने छात्रों को कृषि क्षेत्र में लगातार हो रहे बदलावों और तकनीकी विकास के साथ खुद को अपडेट रखने की सलाह भी दी।

इस दौरान विद्यार्थियों को कॉलेज की नर्सरी और पौध उत्पादन की गतिविधियों के बारे में भी जानकारी दी गई। छात्रों ने नर्सरी में तैयार किए जा रहे पौधों को देखा और पौध उत्पादन से जुड़ी प्रक्रिया को समझा। कॉलेज परिसर में तैयार किए जा रहे हजारों पौधों के बारे में भी विद्यार्थियों को जानकारी दी गई।

वैज्ञानिकों ने बताया कि पौध उत्पादन और नर्सरी प्रबंधन भी कृषि और बागवानी से जुड़े महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं। फूलों और सजावटी पौधों की खेती से लेकर फलदार और उपयोगी पौधों के उत्पादन तक कई क्षेत्रों में रोजगार और स्वरोजगार की संभावनाएं विकसित हो रही हैं। ऐसे में विद्यार्थियों के लिए कृषि शिक्षा भविष्य में अलग-अलग करियर विकल्प खोल सकती है।

शैक्षणिक भ्रमण के दौरान छात्रों को यह समझाने की कोशिश की गई कि कृषि विज्ञान एक ऐसा क्षेत्र है, जिसमें शिक्षा और व्यावहारिक प्रशिक्षण दोनों की महत्वपूर्ण भूमिका है। खेत, प्रयोगशाला, नर्सरी और अनुसंधान गतिविधियों को करीब से देखने से विद्यार्थियों को कृषि की वास्तविक कार्यप्रणाली को समझने का अवसर मिलता है।

कृषि में करियर
कृषि में करियर

कार्यक्रम में विद्यार्थियों की भागीदारी और उनके सवालों से यह भी देखने को मिला कि स्कूली स्तर पर छात्रों में कृषि विज्ञान और इससे जुड़े करियर को लेकर रुचि विकसित की जा सकती है। विशेषज्ञों ने छात्रों को कृषि को केवल पारंपरिक पेशे के रूप में न देखकर विज्ञान, तकनीक और अनुसंधान से जुड़े व्यापक क्षेत्र के तौर पर समझने की जानकारी दी।

पूर्णिया के भोला पासवान शास्त्री कृषि कॉलेज में आयोजित यह शैक्षणिक भ्रमण विद्यार्थियों के लिए कृषि शिक्षा को व्यावहारिक रूप से समझने का एक अवसर रहा। कॉलेज परिसर, प्रयोगशालाओं, नर्सरी, पौध उत्पादन और अनुसंधान गतिविधियों की जानकारी के साथ छात्रों को कृषि क्षेत्र में उपलब्ध करियर विकल्पों के बारे में भी बताया गया।

कुल मिलाकर, इस कार्यक्रम के जरिए विद्यार्थियों को यह समझाने का प्रयास किया गया कि कृषि शिक्षा में आगे बढ़ने के लिए कई रास्ते मौजूद हैं। सरकारी सेवाओं से लेकर अनुसंधान, शिक्षण और तकनीकी विशेषज्ञता तक कृषि क्षेत्र में अलग-अलग संभावनाएं हैं। ऐसे शैक्षणिक भ्रमण विद्यार्थियों को शुरुआती स्तर पर ही अपने करियर को लेकर बेहतर समझ विकसित करने और कृषि विज्ञान के प्रति रुचि बढ़ाने में मदद कर सकते हैं।

 

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