नौकरी के नाम पर ठगी: किशनगंज में सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों रुपये की कथित ठगी और फर्जी नियुक्ति पत्र देने का मामला सामने आया है। पूर्णिया जिले के अमौर निवासी मो. असलम राही ने किशनगंज के एक सरकारी शिक्षक पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित ने मामले को लेकर किशनगंज के एसपी से शिकायत कर निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है। शिकायत में सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर 4 लाख रुपये लेने, पटना में कथित ट्रेनिंग कराने और फर्जी जॉइनिंग लेटर देने का आरोप लगाया गया है।
शिकायत के मुताबिक, किशनगंज के उत्क्रमित मध्य विद्यालय महलबाड़ी में सहायक शिक्षक के पद पर तैनात पंकज कुमार बोसाक ने मो. असलम राही को पशुपालन विभाग में सरकारी नौकरी दिलाने का भरोसा दिया था। आरोप है कि नौकरी लगवाने के बदले शिक्षक ने 4 लाख रुपये की मांग की। पीड़ित का दावा है कि सरकारी नौकरी की उम्मीद में उसने आरोपी को यह रकम दे दी।
मो. असलम राही के मुताबिक, 4 लाख रुपये में से 50 हजार रुपये ऑनलाइन माध्यम से दिए गए, जबकि बाकी 3 लाख 50 हजार रुपये नकद दिए गए। शिकायत में दावा किया गया है कि रकम मिलने के बाद आरोपी शिक्षक उसे पटना लेकर गया। वहां कथित तौर पर उसे पशुपालन विभाग से जुड़ा जॉइनिंग लेटर दिया गया। पीड़ित का आरोप है कि उसे यह भरोसा दिलाया गया कि उसकी सरकारी नौकरी की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और आगे विभागीय स्तर पर योगदान देना है।

शिकायत के अनुसार, पटना में केवल जॉइनिंग लेटर ही नहीं दिया गया, बल्कि कथित तौर पर ट्रेनिंग भी कराई गई। इसके अलावा नोटरी के माध्यम से शपथ पत्र बनवाए जाने का भी दावा किया गया है। इन तमाम प्रक्रियाओं के चलते पीड़ित को यह विश्वास हुआ कि नौकरी से संबंधित औपचारिकताएं वास्तविक हैं और जल्द ही वह सरकारी सेवा में योगदान कर सकेगा।
मामले में एक और नाम डॉ. विष्णु कांत कुमार का सामने आया है। शिकायतकर्ता के मुताबिक, इस पूरे घटनाक्रम के दौरान उसकी मुलाकात डॉ. विष्णु कांत कुमार से भी कराई गई थी। हालांकि, इस मामले में किसकी क्या भूमिका थी, यह जांच का विषय है। फिलहाल शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
पीड़ित ने अपनी शिकायत में यह भी आरोप लगाया है कि अकेले उसके साथ ही ऐसा नहीं हुआ। उसके मुताबिक, चार अन्य युवकों को भी सरकारी नौकरी दिलाने का भरोसा दिया गया था। आरोप है कि इन युवकों को भी इसी तरह कथित ट्रेनिंग कराई गई और बाद में संबंधित जिला कार्यालय में योगदान देने के लिए भेजा गया।
यहीं से कथित फर्जीवाड़े का खुलासा होने का दावा किया गया है। शिकायत के अनुसार, जब पीड़ित विभागीय कार्यालय में योगदान देने के लिए पहुंचा, तब उसे पता चला कि उसके पास मौजूद नियुक्ति या जॉइनिंग से संबंधित दस्तावेज वास्तविक नहीं हैं। इसके बाद उसे कथित तौर पर पूरी प्रक्रिया पर संदेह हुआ और उसने अपने साथ हुए मामले को लेकर रकम वापस मांगनी शुरू की।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि पैसे वापस मांगने पर शुरुआत में रकम लौटाने का आश्वासन दिया गया। लेकिन कई दिनों और फिर महीनों तक उसे कथित तौर पर टालमटोल की जाती रही। पीड़ित के मुताबिक, करीब चार से पांच महीने तक पैसे वापस करने की बात कही जाती रही, लेकिन बाद में रकम लौटाने से इनकार कर दिया गया।

मामला केवल पैसे की वापसी तक सीमित नहीं रहा। पीड़ित ने अपनी शिकायत में फोन पर गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप लगाया है। शिकायतकर्ता का दावा है कि जब उसने अपनी रकम वापस लेने और मामले को लेकर सवाल उठाए, तो उसे कथित तौर पर धमकाया गया।
इसके अलावा आरोपी शिक्षक के भाई संजीत कुमार बोसाक पर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पीड़ित ने दावा किया है कि संजीत कुमार बोसाक उसका पीछा करता था और उसे अकेले में बुलाकर डराने-धमकाने की कोशिश करता था। इन आरोपों के चलते शिकायतकर्ता ने पुलिस से अपनी सुरक्षा और पूरे मामले की जांच की मांग भी की है।
मामले में पुलिस स्तर पर कानूनी कार्रवाई की जानकारी भी सामने आई है। शिकायत के आधार पर किशनगंज के टाउन थाना में प्राथमिकी दर्ज किए जाने की बात कही गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, FIR नंबर 08/26 में भारतीय न्याय संहिता यानी BNS-2023 की धारा 318(4) और 316(2) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
बताया गया है कि विवाद सामने आने के बाद थाने के स्तर पर दोनों पक्षों के बीच समझौता कराने की कोशिश भी की गई थी। हालांकि, शिकायतकर्ता के मुताबिक इस कोशिश के बावजूद मामले का कोई समाधान नहीं निकल सका। इसके बाद उसने पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क कर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।
पीड़ित का कहना है कि उसने नौकरी पाने की उम्मीद में अपनी मेहनत की कमाई की बड़ी रकम दी थी। लेकिन नौकरी मिलने के बजाय उसे कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज और ट्रेनिंग के नाम पर भ्रमित किया गया। अब वह अपनी रकम वापस दिलाने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग कर रहा है।

इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल सरकारी नौकरी के नाम पर कथित तौर पर रकम लिए जाने और नियुक्ति पत्र की वास्तविकता से जुड़ा है। अगर जांच में शिकायतकर्ता के आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला नौकरी के नाम पर लोगों को कथित तौर पर ठगने की एक गंभीर घटना हो सकती है। वहीं, आरोपों की अंतिम पुष्टि पुलिस जांच और उपलब्ध दस्तावेजों की जांच के बाद ही हो सकेगी।
फिलहाल पुलिस के सामने शिकायत में लगाए गए सभी आरोपों की जांच करना, कथित नियुक्ति पत्र और अन्य दस्तावेजों की सत्यता की जांच करना तथा पैसों के लेन-देन से जुड़े तथ्यों को सामने लाना महत्वपूर्ण होगा। साथ ही, मामले में जिन अन्य लोगों के नाम सामने आए हैं, उनकी भूमिका की भी जांच की जा सकती है।
पीड़ित मो. असलम राही ने किशनगंज के एसपी से पूरे मामले में निष्पक्ष जांच, आरोपों के आधार पर कानूनी कार्रवाई और कथित तौर पर ठगी गई 4 लाख रुपये की रकम वापस दिलाने की मांग की है।
अब इस मामले में आगे की पुलिस जांच से ही यह स्पष्ट होगा कि सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर वास्तव में किस स्तर पर कथित फर्जीवाड़ा हुआ, पैसे किसे और किस माध्यम से दिए गए, कथित जॉइनिंग लेटर कहां तैयार हुआ और इस पूरे मामले में अन्य लोगों की क्या भूमिका रही।
फिलहाल मामला पुलिस के पास है और शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच जारी है। इसलिए आरोपी पक्ष की भूमिका और आरोपों की पूरी सच्चाई जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।










