अररिया शहर के प्राचीन सार्वजनिक ठाकुरवाड़ी मंदिर परिसर में महाशिवरात्रि के चार दिन बाद आयोजित होने वाला पारंपरिक चौठाड़ी उत्सव इस वर्ष भी श्रद्धा, उल्लास और भक्ति के अद्भुत संगम के रूप में मनाया गया। बुधवार की रात करीब 8 बजे से शुरू हुए इस आयोजन में भगवान शिव और माता पार्वती की विधिवत पूजा-अर्चना की गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।

मंदिर परिसर शाम ढलते ही रोशनी और फूलों की सजावट से जगमगा उठा। जैसे ही पूजा अनुष्ठान प्रारंभ हुआ, ‘हर-हर महादेव’ और ‘बोल बम’ के जयकारों से वातावरण गुंजायमान हो गया। श्रद्धालु कतारबद्ध होकर शिव-पार्वती के दर्शन करते रहे और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करते नजर आए। महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं की सक्रिय उपस्थिति ने आयोजन को और भी भव्य बना दिया।

चौठाड़ी उत्सव की धार्मिक परंपरा के अनुसार विशेष मंत्रोच्चार, आरती और प्रसाद वितरण का क्रम देर रात तक चलता रहा। पूजा संपन्न होने के बाद मंदिर प्रांगण में भव्य भंडारे का आयोजन किया गया। प्रसाद के रूप में विभिन्न व्यंजन श्रद्धालुओं को वितरित किए गए। रात लगभग 12 बजे तक चले इस भंडारे में शहर ही नहीं, बल्कि आसपास के ग्रामीण इलाकों से आए हजारों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया।

मंदिर प्रशासन और स्थानीय स्वयंसेवकों ने आयोजन को सुव्यवस्थित बनाने के लिए व्यापक इंतजाम किए थे। पार्किंग व्यवस्था, सुरक्षा प्रबंध, पेयजल सुविधा और बैठने की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की गई थी। स्वयंसेवक श्रद्धालुओं को मार्गदर्शन देते और व्यवस्था संभालते नजर आए, जिससे पूरा कार्यक्रम शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ।
इस अवसर पर मंदिर के महंत पंडित कृष्णकांत तिवारी ने कहा कि चौठाड़ी उत्सव स्थानीय आस्था और परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने बताया कि हर वर्ष की तरह इस बार भी यह आयोजन समाज के सभी वर्गों के सहयोग से सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। विशेष रूप से युवाओं की भागीदारी उल्लेखनीय रही, जिन्होंने सजावट, व्यवस्था और भंडारे के संचालन में बढ़-चढ़कर योगदान दिया।
ठाकुरवाड़ी मंदिर अररिया का प्रमुख धार्मिक केंद्र माना जाता है। यहां महाशिवरात्रि के अवसर पर शिव बारात भी निकाली जाती है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। चौठाड़ी जैसे पारंपरिक आयोजन न केवल धार्मिक आस्था को सुदृढ़ करते हैं, बल्कि सामाजिक समरसता और एकता का संदेश भी देते हैं। इस वर्ष का आयोजन इसी सामूहिक भावना और आध्यात्मिक ऊर्जा का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया।
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